आ अब लौट चले !


आ अब लौट चले !
आ रही है नई किरण
नया जोश नई तरंग
आ अब लौट चले !

आ रहे है नये-नये उद्योग
अब न होगा बेरोजगारी
अब न होगा अपनों से दूरी
आ अब लौट चले !

मान मिलेगा सम्मान मिलेगा
देश विदेश से प्यार मिलेगा
अपना भी एक पहचान मिलेगा
आ अब लौट चले !

हम हो गये थे इतिहास
अब फिर से हम आदर्श बनेंगे
अब लोग हमारे राह पे चलेंगे
आ अब लौट चले !

पुराना पाटलिपुत्र लौट रहा है
हम से ये कह रहा है
अब न इसे खोना कभी
आ अब लौट चले !!!
~~~~साधना सिंह


17 टिप्‍पणियां:

  1. अच्छा प्रयास है ........शुभकामनायें !

    उत्तर देंहटाएं
  2. बेहतरीन प्रस्‍तुति ।

    उत्तर देंहटाएं
  3. आपके स्नेहिल समर्थन का आभारी हूँ.
    बहुत सुन्दर सृजन, बधाई.

    उत्तर देंहटाएं
  4. कल 09/02/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं
  5. छोड़ आये उन गली कूंचों को उन्हें फिर याद करते हुए लौटना कितना अच्छा लगता है...
    बहुत सुन्दर...

    उत्तर देंहटाएं
  6. अच्छी प्रस्तुति...
    मेरे ब्लॉग पर आपका आना सुखद लगा..
    शुक्रिया.

    उत्तर देंहटाएं
  7. सही कहा है....अपने नीड में लौटने की ईक्षा मन में हमेशा बलवती होती है.....

    उत्तर देंहटाएं
  8. वाह ||
    बहुत सुंदर ...
    बहुत ही बेहतरीन लिखा है...

    उत्तर देंहटाएं
  9. अच्छा प्रयास है बहुत अच्छा लिखा है आपने बधाई....

    उत्तर देंहटाएं

aap ka swagat hai ...!!!!