प्रतिज्ञा वर्क's फोटो

नमस्कार
प्रतिज्ञा के लिए किए गए काम की ये कुछ पेपर कटिंग और तस्वीरे हे



DEAR FRIENDS


Dear friends,

Recently I got an email which asked the question whether

PRATIGYA was an ashram or an organisation????

So I would like to clarify this to all those who have similar doubts that

PRATIGYA is neither an ashram nor a Sanstha. It is a NGO working for the benefit

of the poor and poorest people. I Sadhana Singh as a patron of this NGO request you to join this NGO and encourage me to work for the benefit.


Well its time for me to go so have a nice day and may God bless us all.


Yours lovingly

Sadhana

प्रतिज्ञा

प्रतिज्ञा सामाजिक सेवा संस्थान की नींव सन २००० इसवी में रखी गयी. हमारे समाज में ऐसा देखा जा रहा था की लोगों में हर चीज के लिए जागरूकता लाना बहुत ही जरुरी हैं. साथ ही, बहुत सारी सुविधाएं जो की सरकार द्वारा उपलब्ध कराई जाती हैं, वो लोगों तक साधन के अभाव में पहुँच नहीं पाती हैं. मेडिकल क्षेत्र से लोगों में जागरूकता लाना Hepatitis, HIV, कुष्ठरोग इत्यादि के लिए बहुत ही जरुरी हैं. प्राथमिक स्कूलों में जाकर बच्चों को उनकी स्वस्थ्य के बारे में उचित जानकारी देते हुए नियमित जांच करना एक बहुत ही जरुरी काम लगा, क्योंकि हमारे देश के भविष्य तो ये बच्चे ही हैं ना. इनसभी कार्यों को उचित ढंगा से संपादित करने के उद्देश्य से इस संस्था की नींव रखी गयी हाजीपुर में श्री संजय कुमार जो की इस संस्था के Founder Secretary हैं. पिछले ९ सालों में इस संस्था ने काफी अच्छे काम किये हैं उपर वर्णित विषयों पे.

मैं साधना सिंह इस संस्था की संरक्षक होने के नाते आपलोगों का अहवान करती हूँ कि आपलोग आगे आवें और हमारे इस संस्था से जुरें ताकि हम बिहार को एक सुनहरा भविष्य की ओर लेके चलें।आने वाले समय में मैं आपको इस संस्था के द्वारा किये गए उल्लेखनीय कार्यों की झलकियाँ भी प्रस्तुत करुँगी। साधना सिंह
आप सभी बिहार से अछी तरह से परीचित होंगे, पर सबसे ज्यादा आप जानते होंगे बिहार को उसके अवगुणों, बुराइयों, उसके बदहाल गांवो से उसकी गरीबी से हरतरफ फैले भ्रस्ताचार से, अपने राज्य मै रोजगार न मिलने के कारन देश के कोने कोने मै रोजी रोटी कमा रहे बिहारियों से. आप बिहार को जानते होंगे एक पिछडे और गरीब राज्य के नाम से…………बुनियादी अवसक्तायों से अभावग्रस्त राज्य के नाम से……………या फिर अपहरण, लूट और सरेआम हत्या होने वाले अपराधों के गढ़ के रूप में…………बाढ़ में डूबे हुए अशिक्षित लोगों से……या फिर बार – बार असम और महारास्ट्र से भगाए जा रहे बेकसूर लोगों से.ये सच है, पर 100% नहीं. बल्कि आधी हकीकत है!!पर मैं आज आप सबको एक ऐसे बिहार से परिचित करने जा राही हूं जो महर्षि विश्वामित्र, बुध, महावीर और अशोक की धरती है. बिहार में स्नातकओ की संख्या आँध्रप्रदेश + केरल से भी अधिक है,यहाँ हत्या और बलात्कार की दर डेल्ही और महारास्ट्र से कम है, बिहार के किसान आत्महत्या नहीं करते.......बिहार हर साल देश को सबसे ज्यादा आईएस अधिकारी देता है हर साल बिहारी टॉप होते है आईएस और अन्य प्रतियोगितावो में.कई बार बिहारी स्टूडेंट्स को प्रतियोगी परिक्षावो में जाने पर बाहर के स्टूडेंट्स….हंगामा करते हैं. कहते है जिस एक्साम में देखो, बिहारी उसी में घुसे चले आते हैं….हर जगह अपना कब्जा ज़माने में लगे है! पर क्या कभी उन लोगों ने बिहार के गाँव (villages)में , यहाँ की उन तंग गलियों में कबी झाकने की कोशिश की है, देखा है कभी की कीस तरह दुनिया से बेखबर गरीबी में भी दिन रात अपनी मंजिल को पाने की कोशिश में लगे रहते हैं…!यहाँ अभावों में भी पढ़ते है….जी तोड़ मेहनत करते हैं और सफल भी होते हैं!पर आलम ये है की सफल होने के बाद लोग अपने नाम के साथ बिहारी सब्द जोड़ने नहीं चाहते …!!. ना जाने क्यों वो खुद को बिहारी कहलाना नहीं चाहते?ये बात अलग है की वे कभी बिहार की तरक्की के लिए कुछ करने की जोहमत भी नहीं उठाते!!!मेरे ख्याल से जिन्होंने बिहार के लिए कुछ नहीं किया , या करने की जरूरत नहीं समझते, उन्हें बिहार की बुराई करने का कोई हक़ नहीं है.जो हो, सो हो! पर पिछले कुछ सालों में तरक्की और बदलाव की अक बयार चली है जो अब कभी नहीं रुकेगी. बिहार के सभी लोग इस बयार को महसूस कर रहे हैं. और जो नहीं महसूस कर रहे,वो सरकार के प्रति अपने नकरात्मक सोच के कारन!ये बदलाव सिक्षा ,व्यापार, मनोरंजन ,बेसिक जरूरतों और जीवन अस्तर जैसे सभी छेत्रों में हो रही है.परन्तु अभी बहुत कुछ होना और करना बाकि है.प्रतिजना समाज चाहता है कुछ करे अपने बिहार के लिए उसके तरक्की के लिए प्रतिज्ञा समाज का बिहार को तरक्की के रस्ते पे निरंतर आगे बढ़ाने के लिए दृढ सांकल है, आइये हम सब मिल के प्रतिज्ञा करे की अपने बिहार के लिए हमसे जो भी होसके करे और इसके नकारात्मक छवि को बदले.पहले कभी बिहार मगध राज्य के रूप में एक समृद्ध राज्य रहा है. नालंदा विश्व विद्यालय जो आज एक खंडहर बन चुक्का है, कभी विश्वविख्यात था!विश्वामित्र की तपो भूमि और बुध, महावीर की कर्मभूमि भी बिहार ही रहा है .आज जरुरत है बिहार में नये अस्तर पर ‘टूरिस्म’ को डेवेलोप करने की। बिहार में ऐसी कई टूरिस्ट प्लेसेस हैं जो इंटरनेशनल लेवल पर डेवेलोप हो सकते है।नालंदा, पावापुरी, राजगीर, गया, बोधगया, मधुबनी जैसे कई ख़ूबसूरत जगहें है!! sadhana